पुराने एससीएसटी कानून को पुनरू लागू करने के लिये प्रधानमंत्री के नाम दिया ज्ञापन


देवास। 1 अगस्त को संत रामपाल जी महाराज के लगभग 2 हजार अनुयाईयों ने कलेक्टर देवास के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन दिया है। संस्था के मिडिया प्रभारी अंकित बडिय़ा पाटीदार ने बताया कि जिला कॉर्डिनेटर नरवल सिंह राजपुतए आशीष चौहानए नारायण चौधरीए प्रीतम परिहार के नेतृत्व में तहसील कॉर्डिनेटर सुरेश गायकवाड़ए चेतन सिंह चावड़ा सहित हजारों अनुयायीयों ने उपस्थित होकर ज्ञापन दिया। आज के दिन पूरे देशभर में प्रत्येक जिला के कलेक्टर महोदय के माध्यम से अनुयाईयों द्वारा प्रधानमंत्री को ज्ञापन दिया गया है। ज्ञापन में माँग की गई है कि 20 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट के जज आदर्श कुमार गोयल की खण्डपीठ के द्वारा जो एसण्सीण्एसण्टीण् कानून को कमजोर करके पिछड़ा व अति पिछड़ा समाज को सम्मान से जीने के अधिकार पर कुठाराघात किया गया हैए उसे पूर्व की तरह लागू करें। यह कानून सन् 1989 में बनाया गया था उसके बाद पिछड़ा व अति पिछड़ा समाज के अधिकारों की रक्षा तथा समाज में सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार प्राप्त हुआ था। परंतु सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस कानून की हवा निकाल दी। अब पिछड़ा व अति पिछड़े समाज को फिर से 100 साल पुराने समय की तरह नरक का जीवन जीने के लिए बाध्य कर दिया गया है। यह सब मौजूदा सरकार का अपने परंपरागत वोटरों को खुश करने के लिए करवाया गया फैसला है। इस फैसले के बाद पूरे भारत में पिछड़ा व अति पिछड़ा समाज अपने को ठगा.सा महसूस कर रहा है। इस समय में संत रामपाल जी महाराज ने इनके अधिकारों की रक्षा व पिछड़ा व अति पिछड़े समाज को सम्मानपूर्वक जीने के अधिकार को दोबारा पूर्व वाले कानून को संसद में बिल पास करवाकर बहाल करने के लिए पिछड़ा व अति पिछड़े समाज के हक में आवाज उठाई है जिस कड़ी में आज ये ज्ञापन पूरे भारतवर्ष में दिए जा रहे हैं।
संत रामपाल जी महाराज किसी जाति.पाति को नहीं मानते। उनका नारा है किरू.
जीव हमारी जाति हैए मानव धर्म हमारा । हिन्दु मुस्लिम सिक्ख ईसाईए धर्म नहीं कोई न्यारा ।।
फिर भी किसी भी मानव जातिए धर्म व समुदाय के खिलाफ सरकार द्वारा अन्याय करने पर संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में श्श्राष्ट्रीय समाज सेवा समित्य्यि तन.मन.धन से उस संगठनए समुदाय के साथ सहयोग करने में तत्पर रहती है तथा आखरी समय तक उसका साथ देकर सरकार द्वारा हो रहे अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ती रहती है।
आज भी हमारी प्रधानमंत्री से माँग है कि उक्त कानून को पूर्व की तरह लागू करें अन्यथा हम सभी भारतवर्ष में पिछड़ा व अति पिछड़े समाज के द्वारा किए गए किसी भी संवैधानिक व अहिंसापूर्वक आंदोलन को तन.मन.धन से आखिरी दम तक सहयोग देंगे।

Comments